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मोरपंख की कहानी

सुंदर चीज़ बड़ी नहीं होनी चाहिए। धीरे पकड़ना ही कहानी है।

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हाय Aavya। रास्ते पर एक मोरपंख पड़ा था। नीला, हरा, और एक आँख जैसा गोला। Aavya ने उसे मुट्ठी में भींच लिया, ताकि कोई ले न जाए। एक रंग हाथ पर लग गया। पंख की आँख मुरझा गई। क्यों? क्योंकि ज़ोर सुंदर चीज़ को मिटा देता है। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण के पंख ढीले थे। अच्छी चीज़ें अक्सर छोटी होती हैं। उन्हें धीरे पकड़ो। Aavya ने मुट्ठी ढीली की। पंख वापस गोल हुआ। Aavya, जो अच्छा हो, उसे दबाओ मत।

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