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बाँटना सीखने की कहानी

बाँटना भाषण नहीं। एक मीठी चीज़ आधी करना है।

अगलीअंधेरे का डर
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हाय Aavya। थाली में दो लड्डू थे। Aavya ने दोनों अपने पास खींच लिए। लगा, दे दूँगा तो मेरे पास कुछ नहीं बचेगा। दोस्त फर्श देखने लगा। क्यों यह हल अधूरा था? क्योंकि दोनों अपने पास रखने से मिठास अकेली रह जाती है। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण बोले, एक हाथ में रखो। एक आगे बढ़ाओ। Aavya ने एक लड्डू सरकाया। दोनों ने एक साथ खाया। Aavya, बाँटना इतना ही है। एक अपने पास, एक किसी और के पास।

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