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होली की कहानी बच्चों के लिए

खेल तभी खेल है जब दूसरा भी हँस रहा हो।

अगलीझूला
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हाय Aavya। होली का दिन था। Aavya के हाथ में रंग था। एक छोटा दोस्त आँख मींच कर खड़ा था। सब फेंक रहे थे, तो Aavya ने भी हाथ उठाया। क्यों रुकना चाहिए था? क्योंकि भीड़ किसी की आँख की हाँ नहीं होती। Aavya कृष्ण के पास गया। कृष्ण के गाल पर गुलाबी रंग था, और उनका हाथ रुका हुआ था। तुम तैयार हो तो ही रंग। दोस्त मुस्कुराया, तब रंग लगा। Aavya, खेल तभी खेल है जब दूसरा भी हँस रहा हो।

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