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दिवाली पर गली का कुत्ता मोती

दिवाली रोशनी का त्योहार है। एक शांत दीया डरे हुए दोस्त को सुरक्षित महसूस करा सकता है।

अगलीरंगोली में छोटे पैर
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हाय Aavya। दिवाली की रात गली दीयों से जगमग थी। फिर पटाखे शुरू हुए। धड़ाम! धड़ाम! मोती, भूरा गली का कुत्ता, स्कूटर के नीचे भागा और पूरा काँपने लगा, कान नीचे। Aavya का मन हुआ, मोती को बाहर खींचकर गले लगा ले। पर Aavya रुक गया। क्यों? क्योंकि डरा हुआ कुत्ता काट सकता है, दोस्त वाला भी। तो Aavya ने कटोरे में पानी भरा और धीरे से स्कूटर के पास सरका दिया। फिर Aavya सीढ़ी पर बैठा, ज़्यादा पास नहीं, और दादी ने एक छोटा दीया जलाने में मदद की। Aavya ने बड़े लड़कों से कहा, भैया, पटाखे गली के उस छोर पर फोड़ो? उन्होंने मोती को देखा और सिर हिलाया। धीरे-धीरे धमाके दूर चले गए। मोती ने पानी पिया, फिर अपनी नाक Aavya के जूते पर रख दी। Aavya, दिवाली रोशनी का त्योहार है। एक शांत दीया सबसे प्यारा तोहफ़ा हो सकता है।

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