हाय Aavya। पंडाल रोशनी, ढाक और लोगों से भरा था। माँ दुर्गा दस हाथों के साथ ऊँची खड़ी थीं, और उनका शेर मुस्कुरा रहा था। Aavya ने ऊपर देखा, और ऊपर, और माँ का हाथ छूट गया। अचानक चारों तरफ़ बस पैर और साड़ियाँ थीं। Aavya का दिल ढाक की तरह बजने लगा। पहला ख़याल आया, भागकर माँ को ढूँढूँ। पर Aavya को घर पर माँ की बात याद आई। खो जाओ तो वहीं रुको। क्यों? क्योंकि भागता बच्चा मुश्किल से मिलता है, और रुका हुआ बच्चा आसानी से। Aavya शेर के पास रुका रहा और फूल वाली आंटी से कहा, मेरी माँ का नाम रीना है, और यह उनका नंबर है। आंटी ने फ़ोन किया। माँ दौड़ती हुई आईं और Aavya को कसकर पकड़ लिया। Aavya, माँ दुर्गा के दस हाथ हैं। तुम्हारी माँ के दो हैं, तो एक को कसकर पकड़ो। और छूट जाए, तो वहीं रुको।
1 / 8
कहानी पढ़ें
सारी कहानियाँ
त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।