हाय Aavya। गुरपुरब पर Aavya सिर पर कपड़ा बाँधकर गुरुद्वारे गया। बड़े हॉल में ज़मीन पर लंबी दरियाँ बिछी थीं। सब एक पंगत में बैठे, कंधे से कंधा मिलाकर। Aavya के पास चमकीले कोट वाले एक अंकल बैठे थे, और उनके पास वो रिक्शा वाले भैया, जो Aavya को स्कूल ले जाते हैं। Aavya ने धीरे से पूछा, ये भी साथ बैठते हैं? मम्मी मुस्कुराईं। लंगर में सब एक पंगत में बैठते हैं। न कोई ऊँचा, न कोई नीचा। एक सेवादार गरम रोटियाँ, दाल और खीर लेकर आए, और सबको एक जैसा दिया। Aavya ने सब खा लिया। फिर Aavya का मन हुआ, मैं भी मदद करूँ। Aavya रोटियों की टोकरी लेकर धीरे-धीरे पंगत में चला, पूछते हुए, रोटी जी? Aavya, गुरु नानक के लंगर में सब बराबर हैं। और सेवा करना उतना ही अच्छा लगता है जितना खाना।
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त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।