बच्चों के लिए त्योहार की कहानियाँ
ये चार से आठ साल के बच्चों के लिए त्योहार की छोटी कहानियाँ हैं। भाषण नहीं, बस एक पल: भीड़ में माँ का हाथ, डरा हुआ कुत्ता, बिगड़ी रंगोली, लंगर की पंगत। बच्चे का नाम कहानी में आता है, लिंक या कुकी में नहीं।
त्योहार पर बच्चों को कौन सी कहानी सुनाएँ?
जो त्योहार पास है, उसी से शुरू करें। अक्टूबर में दुर्गा पूजा और दशहरा, फिर दिवाली और भाई दूज।
ये कहानियाँ क्या सिखाती हैं?
भीड़ में खो जाने पर रुकना, डर लगे तो हाथ पकड़ना, जानवरों से नरमी, बाँटना, और पड़ोसियों के त्योहार में शामिल होना।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।