हाय Aavya। आज लाइन लिखनी थी, और पूरी बेंच में एक ही पेंसिल तेज़ थी, Aavya की। बगल में मीरा की पेंसिल बीच से टूट चुकी थी। वह काग़ज़ को ऐसे घूर रही थी जैसे काग़ज़ खुद लिख देगा। Aavya ने सोचा, अगर मैं दे दूँ तो मेरी लाइन आधी रह जाएगी। इसलिए झुककर खुद लिखने लगा। मीरा की आँखें नम हो गईं। तभी Aavya रुका। क्यों? क्योंकि अध्यापिका ने कहा था, पन्ना दोनों का भरना है, एक का नहीं। Aavya ने पेंसिल को बीच में रख दिया। एक लाइन मीरा की। एक लाइन Aavya की। पेंसिल छोटी नहीं पड़ी। दोनों के पन्ने भर गए, और मीरा हँस पड़ी। Aavya, जब चीज़ एक हो और हाथ दो हों, तो बारी ही हल है।
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कक्षा 2 की छोटी नैतिक कहानियाँ कौन सी हैं?
पेंसिल, टूटा गिलास, रोज़ पानी, एक छाता, धन्यवाद, दौड़, टिफिन और किताबें। हर कहानी छोटी है, कक्षा 2 के बच्चे के लिए।
छोटी नैतिक कहानियाँ बच्चों को क्या सिखाती हैं?
सच बोलना, आधा बाँटना, रोज़ थोड़ा काम करना, और मदद माँगना। एक घटना काफी है।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।