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एक छाते की कहानी

छाता तभी काम करता है जब दोनों एक ही तरफ़, एक ही रफ़्तार से चलें।

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हाय Aavya। स्कूल के फाटक पर बारिश अचानक शुरू हो गई। Aavya के पास छाता था। आरव के पास नहीं था, वह बैग को सिर पर रखे खड़ा था। Aavya ने सोचा, मैं तेज़ चलूँ तो घर जल्दी पहुँचूँगा, आरव पीछे आ जाएगा। क्यों यह बात अधूरी थी? क्योंकि बारिश दोनों पर एक साथ पड़ रही थी, और तेज़ कदम छाते को एक तरफ़ खींच लेते हैं। Aavya दो कदम बढ़ा और आरव भीगने लगा। फिर Aavya रुका। आओ, कंधा सटाओ। दोनों धीरे चले। छाते के बीच में जगह बन गई। जूते गीले हुए। बाल सूखे रहे। आरव हँसा, मेरे बैग को अब टोपी नहीं बनना पड़ा। Aavya, एक छाता दो सिर ढक लेता है, अगर कदम साथ हों।

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