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धन्यवाद की कहानी

मदद के बाद लंबा भाषण नहीं। एक छोटा शब्द काफी है।

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हाय Aavya। पेंसिल डेस्क के नीचे लुढ़क गई। Aavya हाथ नहीं पहुँचा पाया। बगल वाली मीरा झुकी, घुटने पर धूल लगी, और पेंसिल उठा दी। Aavya ने पेंसिल ले ली और कॉपी पर लौट गया। मीरा रुकी रही। उसका चेहरा ऐसा था जैसे उसने कुछ खोया हो। क्यों? क्योंकि मदद के बाद चुप्पी, मदद को छोटा कर देती है। Aavya ने सिर उठाया। धन्यवाद, मीरा। मीरा मुस्कुराई, धूल झाड़ी, और अपनी कॉपी पर लौट गई। और कुछ नहीं होना था। Aavya, मदद के बाद भाषण मत दो। एक धन्यवाद ही दोपहर ठीक कर देता है।

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