हाय Aavya। दोपहर को Aavya का डिब्बा खुला। दो पराँठे, थोड़ी सब्ज़ी। बगल में आरव का डिब्बा खाली जगह था। वह पेट पर हाथ रखे बैठा था। Aavya ने सोचा, दोनों पराँठे दे दूँ तो मैं भूखा रहूँगा। क्यों यह हल अधूरा था? क्योंकि पूरा दे देना एक को खिलाता है और दूसरे को खाली छोड़ता है। Aavya ने एक पराँठा बीच से तोड़ा। आधा आरव की तरफ़ सरकाया। सब्ज़ी भी दो चम्मच। दोनों ने खाया। आरव बोला, अब पेट शांत है। खेल की घंटी बजी तो दोनों एक साथ उठे। Aavya, आधी रोटी के बाद भी दोपहर पूरी होती है।
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कक्षा 2 की छोटी नैतिक कहानियाँ कौन सी हैं?
पेंसिल, टूटा गिलास, रोज़ पानी, एक छाता, धन्यवाद, दौड़, टिफिन और किताबें। हर कहानी छोटी है, कक्षा 2 के बच्चे के लिए।
छोटी नैतिक कहानियाँ बच्चों को क्या सिखाती हैं?
सच बोलना, आधा बाँटना, रोज़ थोड़ा काम करना, और मदद माँगना। एक घटना काफी है।
क्या बच्चे का नाम कहीं सेव होता है?
नहीं। नाम सिर्फ इसी पेज की कहानी में दिखता है और आवाज़ बनाने के लिए जाता है। यह लिंक, कुकी या रिकॉर्ड में नहीं रहता।