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प्यासे कौवे की कहानी

थोड़ा-थोड़ा काम बार-बार करने से घड़ा भरता है।

अगलीशेर और खरगोश
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हाय Aavya। धूप तेज़ थी। एक कौवे का गला सूख रहा था। उसे एक घड़ा दिखा। पानी था, पर बिल्कुल नीचे, चोंच वहाँ तक नहीं जाती। कौवे ने पहले घड़े को धक्का दिया। घड़ा भारी था, हिला नहीं। क्यों हिला नहीं? क्योंकि पानी और मिट्टी दोनों ने उसे ज़मीन से चिपका रखा था। कौवा चोंच पटककर चिल्लाया। पानी एक बाल भी ऊपर नहीं आया। तभी उसे कंकड़ दिखा, गोल और छोटा। टप। एक आवाज़। फिर टप। हर कंकड़ पानी को थोड़ा ऊपर धकेलता। कौवे की गर्दन दुखने लगी, फिर भी वह रुका नहीं। बारहवें कंकड़ पर पानी चोंच को छू गया। उसने धीरे पिया, जैसे कोई ठंडी शाम पी रहा हो। Aavya, बड़ा काम अक्सर छोटे टप से पूरा होता है।

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