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शेर और खरगोश की कहानी

खरगोश लड़ता नहीं। घमंड खुद अपना चेहरा देखकर रुक जाता है।

अगलीबंदर और मगरमच्छ
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हाय Aavya। जंगल का शेर हर दिन दहाड़ता, मैं सबसे बड़ा हूँ, आज एक खरगोश मेरे पास आए। छोटे खरगोश की बारी आई। वह देर से पहुँचा। शेर गुर्राया, इतनी देर क्यों। खरगोश काँपता तो था, पर बोला, रास्ते में एक और शेर मिला। वह कहता है वही बड़ा है, और उसने मुझे रोक लिया। क्यों खरगोश ने लड़ाई नहीं की? क्योंकि उसके दाँत शेर के दाँतों से छोटे थे, और छोटी ताकत सीधे टकराए तो खरगोश ही हारता। शेर बोला, चल, वह शेर कहाँ है। खरगोश उसे एक गहरे कुएँ तक ले गया। पानी शांत था। शेर ने नीचे देखा। वहीं एक अयाल, वही दाँत, वही गुस्सा। उसने दहाड़ मारी। कुएँ ने दहाड़ लौटा दी। शेर समझा, कोई दूसरा उसे चुनौती दे रहा है। वह शर्म से पीछे हट गया। खरगोश धीरे घर की तरफ़ दौड़ा। Aavya, जो अपने आप को बहुत बड़ा समझे, उसे अक्सर अपना ही चेहरा रोक लेता है।

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