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बिल्ली और इनाम की कहानी

जब शर्त साफ हुई, खाली दावा टिकता नहीं।

अगलीसोने का पेड़
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हाय Aavya। दरबार में एक थैली सिक्कों की रखी थी। पंडित एक साथ बोलने लगे, यह मेरे लिए है, मैं सबसे बड़ा विद्वान हूँ। शोर बढ़ता गया। क्यों लड़ाई रुकी नहीं? क्योंकि हर कोई अपनी बड़ाई बता रहा था, और बड़ाई में कोई माप नहीं होती। तेनाली रामा एक बिल्ली गोद में लेकर आए। बिल्ली ने एक बार मींऊ किया, फिर आँखें मूँद लीं। रामा बोले, इनाम उसे मिलेगा जो इस बिल्ली को एक पन्ना पढ़ा दे। पंडितों की आवाज़ धीमी हो गई। एक ने हाथ बढ़ाया, बिल्ली ने जम्हाई ली। दूसरा पीछे हटा। धीरे-धीरे सब अपना रास्ता नाप गए। थैली वहीं रही। Aavya, साफ शर्त के आगे खाली दावा टिकता नहीं।

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