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शबरी के बेर

प्यार कभी बेढंगा दिखता है। मीठा वही होता है।

अगलीहनुमान की उड़ान
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हाय Aavya, झोपड़ी के बाहर शबरी बेर तोड़ रही थीं। एक चखा, खट्टा था, फेंक दिया। एक चखा, मीठा था, पत्ते पर रख दिया। राम आए तो वही चखे हुए बेर खाए, और मुस्कुराए। Aavya, किसी के लिए मीठा चुनना भी एक तरह का प्यार है।

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