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बीरबल की खिचड़ी

दूर से आसान लगने वाला काम पास जाकर कठिन होता है।

अगलीलंबी लकीर
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हाय Aavya। सर्दी की रात एक आदमी महल के आँगन में खड़ा रहा, इनाम के लिए। आग दूर थी, वह कंबल माँग नहीं पाया। सुबह वह काँपते हुए बोला, मैंने सारी रात ठंड सही है, इनाम दीजिए। अकबर सोच में पड़ गए। क्यों फैसला मुश्किल था? क्योंकि दूर से देखने पर आदमी आग के पास लगा, और पास जाकर पता चला कि लौ उसके गाल तक नहीं पहुँची। बीरबल चुप रहे। दोपहर को उन्होंने एक कढ़ाई खिचड़ी की आग से बहुत ऊपर, एक लंबी रस्सी पर लटका दी। अकबर बोले, यह कैसे पकेगी। बीरबल बोले, जैसे वह आदमी दूर की आग से गर्म हुआ, हुज़ूर। खिचड़ी ठंडी रही। आदमी समझ गया। इनाम की बात वहीं रुक गई। Aavya, किसी काम को पास से देखो। तभी उसकी ठंड समझ आएगी।

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